-लगभग पूरा विश्व है आज परमार्थ गंगा तट पर
-सामूहिक योग साधना से प्रेम योग तक की दिव्य यात्रा
-परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर मानो पूरा विश्व एक साथ उपस्थित, यह एक महोत्सव नहीं, बल्कि मानवता की चेतना का एक अद्भुत संगम
-विश्व के लगभग 80 देशों से आए 1500 से अधिक योग साधक, 75 योगाचार्य, 35 देशों के विद्यार्थी और 10 देशों के राजदूत, राजनायिक तथा उच्चायुक्त एक ही धरा पर, एक ही भावना के साथ हैं एकत्रित
-आज जब दुनिया के अनेक हिस्सों में संघर्ष, विभाजन और युद्ध की आहट सुनाई दे रही है, तब परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश की यह पावन भूमि और माँ गंगा का यह तट शांति का, प्रेम का और एकता का संदेश दे रहा
-विभिन्न देशों, संस्कृतियों, भाषाओं और विचारों के लोग योग की पवित्र साधना हेतु परमार्थ निकेतन में एकत्रित
-मानवता की असली पहचान सीमाओं, राष्ट्रों और भाषाओं से परे
ऋषिकेश। विश्व भर से आए योग साधक परमार्थ निकेतन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिवस पर माँ गंगा के पावन तट पर एकत्रित हुए। दिन की शुरुआत एक शक्तिशाली सामूहिक योग साधना से हुई और समापन पवित्र परमार्थ गंगा आरती तथा संगीत, नृत्य और आनंदमय उत्सव से हुआ।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन, 2026 कि सात दिनों की दिव्य यात्रा एक योग उत्सव के साथ मानवता के जागरण की एक वैश्विक साधना है। यहाँ भारत की आत्मा, उसकी संस्कृति, योग और अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप विश्व के सामने प्रकट हो रहा है।
एक सप्ताह से चल रही परिवर्तनकारी साधनाओं, ज्ञानवर्धक सत्रों और आध्यात्मिक उत्सवों के पश्चात प्रतिभागी पुनः माँ गंगा के पावन तट पर एकत्रित हुए, सभी ने मिलकर विश्व शान्ति के लिये प्रार्थनायें की और विश्व शान्ति यज्ञ में आहुतियाँ दी।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन की शुरुआत विशेष सामूहिक योग प्रोटोकॉल के साथ हुई।
परमार्थ निकेतन के पवित्र घाट पर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के चरणों में विश्व के विभिन्न देशों से आए राजदूत, उच्चायुक्त, राजनायिक, योग साधक और योगाचार्यों ने योगाचार्य गंगा नन्दिनी जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में एक साथ योग का अभ्यास किया।
इसमें इक्वाडोर के राजदूत एच.ई. फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास, गुयाना के उच्चायुक्त एच.ई. धरमकुमार सीराज, बेलारूस के राजदूत एच.ई. मिखाइल कास्को,
मंगोलिया के राजदूत एच.ई. गणबोल्ड दंबाजाव, योगाचार्य स्टुअर्ट गिलक्रिस्ट, दासा दास, स्टाइन सहित अनेक योगाचार्यों और साधकों ने सहभाग किया।
यह आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, की 100-दिवसीय उलटी गिनती के 98वें दिन के रूप में भी विशेष रहा।
प्रतिभागियों ने प्रतिदिन के जीवन में योग को अपनाने तथा 21 दिसम्बर को मनाए जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस के महत्व को साझा किया।
परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य नेतृत्व में, तथा भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय (इन्क्रेडिबल इंडिया) के सहयोग से आयोजित परमार्थ निकेतन का अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव विश्व के 80 से अधिक देशों से आए प्रतिभागियों के साथ एक सप्ताह तक योग, आध्यात्मिकता और जागरूक जीवनशैली के वैश्विक उत्सव के रूप में सम्पन्न हो रहा है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक चेतना है, वह चेतना जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” व सर्वें भवन्तु सुखिनः का संदेश देती है।
यहाँ योग मन, आत्मा और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने का सेतु है। माँ गंगा के पावन तट पर जब विभिन्न देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के साधक एक साथ बैठकर ध्यान, प्रार्थना और साधना करते हैं, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि योग सीमाओं से परे है।
आज जब विश्व युद्ध, संघर्ष और विभाजन के दौर से गुजर रहा है, तब यह महोत्सव शांति का, करुणा का और प्रेम का एक शक्तिशाली संदेश देता है।
यहाँ आये साधक देशों के प्रतिनिधि बनकर नहीं, बल्कि मानवता के साधक बनकर आयें हैं।
इन सात दिनों की यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि सच्ची शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और एकता में है।
यही भारत का संदेश है, यही योग का संदेश है और यही वह प्रकाश है जो पूरी दुनिया को दिशा दे सकता है।
डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि प्रेम हमारे जीवन के अनुभव को हमारे शरीर, मन और हमारे संबंधों को बदल देता है। हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषियों और योगियों ने उस सत्य को समझ लिया था, जिसे आज आधुनिक न्यूरोसाइंस भी स्वीकार कर रहा है कि प्रेम हमारे लिए अत्यंत लाभकारी है।
यह हमारे मस्तिष्क की रसायन प्रक्रिया को संतुलित करता है, हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और हमारी बुद्धि तथा समग्र स्वास्थ्य को बेहतर करता है।
हमारा शरीर प्रेम की अवस्था में सबसे बेहतर ढंग से कार्य करने के लिए बना है।
चाहे वह प्रेम किसी बच्चे के लिए हो, जीवनसाथी के लिए, किसी पालतू जीव के लिए, प्रकृति के लिए या परमात्मा के लिए, शरीर उस प्रेम को एक ही प्रकार की उपचारात्मक शक्ति के रूप में अनुभव करता है।
प्रेम हमें अधिक शांति, स्वास्थ्य और स्पष्टता के साथ जीवन जीने में सहायता करता है। जब हम प्रेम की बात करते हैं, तो हमें इसे केवल रोमांस या भावनात्मक नाटक तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
रोमांस सुंदर हो सकता है, लेकिन सच्चा प्रेम उससे कहीं अधिक गहरा होता है।
सच्चा प्रेम वह है जब हमारा हृदय खुलकर उस सत्य को स्वीकार करता है कि हम वास्तव में कौन हैं।
ब्राजील से आये प्रेम बाबा जी ने योग को प्रेम और धर्म पर आधारित एक गहन आध्यात्मिक आह्वान के रूप में बताते हुये कहा कि “कुछ लोग योग सीखने के लिए आते हैं ताकि अपनी साधना को और गहरा कर सकें या इसे विश्व के साथ साझा कर सकें,
लेकिन केवल तकनीकें सीखने से परे, बहुत से लोग किसी गहरे आह्वान का उत्तर दे रहे होते हैं, यह प्रेम का आह्वान है। यही प्रेम वह शक्ति है जो हम सभी को जोड़ती है और यही जीवन का मूल कारण भी है।
सनातन धर्म की परम्परा में योग उस विशाल, अनन्त ज्ञान रूपी पुष्प की एक पंखुड़ी है, जो हमें हमारे सच्चे घर की ओर लौटने का मार्ग दिखाती है। हमारे शास्त्र इस यात्रा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि हम वास्तव में कौन हैं।
भगवद्गीता में एक सुंदर उदाहरण अर्जुन के माध्यम से मिलता है। जब वह भ्रम और द्वंद्व में पड़ जाता है और यह नहीं समझ पाता कि क्या सही है और क्या गलत, तब वह भगवान कृष्ण से मार्गदर्शन मांगता है।
उस दिव्य मार्गदर्शन के माध्यम से अर्जुन अपने भीतर के संघर्ष का सामना करता है, अपने अंधकार को पहचानता है और अंततः अपने वास्तविक उद्देश्य को पुनः खोज लेता है।”
आज के आध्यात्मिक सत्र “प्रेम योग” पर विशेष चिंतन हुआ।
अंतिम दिवस का प्रमुख आध्यात्मिक सत्र द योग ऑफ लव, ओपनिंग द हार्ट ऐज अ पाथ ऑफ अवेकनिंग विषय पर आयोजित किया गया। इस विशेष आध्यात्मिक संवाद में विख्यात संत पूज्य श्री प्रेम बाबा तथा पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने उद्बोधन दिया।
इस सत्र के माध्यम से संदेश दिया कि प्रेम, करुणा और भक्ति ही योग और आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक सार हैं। जब हम जागरूकता, समर्पण और सेवा के माध्यम से अपने हृदय को खोलते हैं, तब हम अलगाव से ऊपर उठकर सम्पूर्ण सृष्टि की एकता का अनुभव करते हैं।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि हृदय के जागरण और करुणामय जीवन की ओर ले जाने वाला आध्यात्मिक मार्ग है।
प्रातःकालीन साधनाओं में हिमालय पर उगते सूर्य के साथ प्रतिभागियों ने प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक सुधांशु शर्मा के साथ सूर्योदय मंत्रोच्चार में भाग लिया, जिससे वातावरण भक्ति और ऊर्जा से भर गया। इसके पश्चात अनेक योग सत्र आयोजित हुए, जिनमें सियाना शेरमैन द्वारा मुद्रा, मंत्र, तंत्र और श्वास की उपचारात्मक शक्ति, स्टुअर्ट गिलक्रिस्ट द्वारा योगासन एवं सत्संग, दुर्गेश अमोली द्वारा योग थेरेपी, डॉ. आनन्द बालयोगी भावनानी द्वारा अष्टांग योग साधना, डॉ. क्रिस्टोफर की चैपल द्वारा एलिमेंटल मेडिटेशन, डॉ. राधिका नागरथ द्वारा प्राणायाम, मुद्रा और विश्राम, साथ ही स्टाइन डुलोंग और साथियों द्वारा मंत्र ध्यान और कीर्तन ने दिन की शुरुआत को अत्यंत भक्तिमय बना दिया।
दोपहर में विभिन्न आध्यात्मिक और अनुभवात्मक कार्यशालाएँ आयोजित हुईं जिसमें डॉ. योगऋषि विश्वकेतु, आत्मविश्वास के लिए प्राणायाम, एच.एस. अरुण, दिव्य समर्पण की साधना, दासा दास, विन्यास योग फ्लो, डॉ. संजय मंचंदा, प्राचीन ध्यान और आधुनिक विज्ञान का संगम, गंगा नन्दिनी, गंगा योग, इसके अतिरिक्त जय हरि सिंह द्वारा निर्विकल्प प्रेम, आध्या द्वारा योग निद्रा, तथा गायत्री योगाचार्या द्वारा साधना का मार्ग विषयों पर सत्र आयोजित हुए। आयुर्वेदाचार्य डॉ. कृष्ण पंकज नरम ने ऋतु के अनुसार रोगों से बचाव के प्राचीन ज्ञान को साझा किया।
गुरनिमित सिंह ने कंठ चक्र साधना सिखाई। जेम्स कैसिडी और साथियों ने संगीत और भक्ति के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण से जुड़ने का अनुभव कराया। साउंड बाथ और स्वर साधना जैसे सत्रों ने प्रतिभागियों को गहन विश्राम और आंतरिक संतुलन का अनुभव कराया।
सप्ताह भर के आध्यात्मिक अनुभवों को स्मरण करते हुए यह क्षण कृतज्ञता और एकता का प्रतीक बन गया।
अंत में अर्जेंटीना की योगिनी सैंड्रा बार्न्स और उनके साथियों के साथ काकाओ सेरेमनी, एलिमेंटल डांस और सेक्रेड साउंड्स के माध्यम से आनंदमय उत्सव हुआ, जिसने माँ गंगा के पावन तट पर अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 को एक दिव्य और प्रेरणादायी समापन प्रदान किया।
