हरिद्वार। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश नरेन्द्र दत्त के आदेशानुसार कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध व निवारण अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष एवं प्रथम अपर जिला जज नीलम रात्रा ने कहा कि यौन शोषण केवल शारीरिक संपर्क तक सीमित नहीं है बल्कि यौन शोषण का अर्थ अश्लील टिप्पणियां, अश्लील चित्र दिखाना या किसी भी प्रकार का अवांछित व्यवहार भी इसी श्रेणी में आता है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता व प्राधिकरण की सचिव सिमरनजीत कौर ने एक कार्यक्रम प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उपस्थित प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम,निषेध व निवारण कानून के बारे में जानकारी दी ।
उन्होंने बताया कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना,उनके मौलिक अधिकारों,समानता,गरिमा व व्यवसाय की स्वतंत्रता की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि संस्थान में 10 से अधिक महिला कर्मचारी हैं, उस संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन जरूरी है।पीड़ित महिला घटना के तीन महीने के अंदर समिति को लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है। जिसपर समिति को 90 दिनों के अन्दर जांच पूरी करनी होती है। संस्थान प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह कार्यस्थल पर महिला कर्मी के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करें। संस्थान पर कानून के नियमों का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये तक के जुर्माने व लाइसेंस रद्द होने तक का प्रावधान है। । इस दौरान कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि नीलम रात्रा सभी विभागों व एनजीओ की ओर से प्रतिभाग करने वाली करीब 45 महिलाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर पोक्सो सहायक सीमा चौहान, नीलम मेहता, सरिता नौटियाल एवं वैशाली आदि उपस्थित रही।
